दायित्वो को बांटने से क्या शांत हो पायेगा उनका इंतजार?
2027 से पूर्व क्या होना है की अफवाहें फैली?

देहरादून/14अप्रैल। वर्तमान सरकार के तीन साल बीत गए मुख्यमंत्री की टीम ने कार्य भी अभूतपूर्व रूप से जम कर किए। किन्तु विपक्ष के साथ ही लगा संगठन में भी कहीं न कहीं टीम की सफलता शायद गले नहीं उतरी दिखाई पड़ी। शुरुआत में खाली पड़े तीन पद के बाद चंदन रामदास जी के निधन से ये संख्या चार हो गई थी। तीन साल कार्यकाल के साथ एक ओर कद्दावर नेता जी भी राज्य में बरपे हंगामे के शिकार हो गए या कुछ भी समझें वे इस घटनाक्रम से अपना इस्तीफा सौप गए। अब सरकार में पांच पद खाली हो गए । बारह में से सात मंत्री राज्य में कार्यभार संभाले हुए हैं। पार्टी अध्यक्ष भट्ट ने गत वर्ष से दो बार बयान देकर जल्द पद भरने का राग अलापते रह गए परिणाम शून्य रहा। हां ये जरूर हुआ कि कुछ नाराज नहीं उदास नेताओं को दायित्व से लॉटरी जरूर लग गई। मुख्यमंत्री जी के दिल्ली दौरे भी भाईसाहब खासे चर्चाओं में रहे यदि सी एम साहब राज्य हित में किसी योजना के संदर्भ में जाते एक राजनीतिक विशेषज्ञों टीम तो मंत्रियों को बनाने साथ ही फलां मंत्रालय किसे मिल रहा है दोस्तो में शेयर करते नजर आते रहे। होली हो दिवाली हो निकाय चुनाव हो बार बार स्थिति देख पुराने विधायकों ने इंतजार करना तक बंद कर दिया। कोई कह रहा था अनुभवी विधायक महोदय तो कई सेट कुर्ते पजामे के सिलवा कर अलमारी में वापस रखवा चुके । बड़बड़ाहट में माननीयों के श्री मुख से ये भी सुना गया बताया गया कि शायद पूरा अमला बदलने पर ही अपना नंबर आयेगा। स्वरों को शांत करने के लिए दायित्व देकर शांति कायम हुई के नहीं हां ये जरूर है कि इस प्रसाद वितरण के बाद अब शायद ये लोग अपने सूत्रों से देश की राजधानी में सन्देश भिजवाने में लगे हुए हैं ये अफवाहे होती है या कानाफूसी? क्या ये मुंगेरीलाल के सपने तो नहीं हैं बल।



