Blogपॉलिटिकल तड़कामुद्दा गरम हैराष्ट्रीय
“रामदेव का बयान”आर एस एस एवं भाजपा के बीच कोई खटास तो नहींआ गई
गुजराती, यू पी एवं पुरानी संघ विचारधारा में टकराव का आभास हो सकता है

ज्वलंत मुद्दा (उत्तराखंड डेस्क)। जन्म समय से निर्जीवप्रायः रहा आज का विश्व में सबसे बड़ा दल भारतीय जनता पार्टी 1988 तक 2सीटों वाली पार्टी रही जो 1989में कांग्रेस के विरुद्ध जनता दल के साथ चुनाव में गठबंधन करके साथ में विश्व हिंदू परिषद/आर एस एस के गठजोड़ के माध्यम से 89सीटों को लेकर नई ताकत से देश के समक्ष दिखाई दी। इसके बाद रामजन्मभूमि आंदोलन के साथ ही अटल जी के नेतृत्व में तीन बार क्रमशः 13दिन, 13महीने एवं पूर्णकालीन सरकार 2004तक चली थी। इसके बाद दो बार यू पी ए की सरकार के बाद संघ की पूरी ताकत एवं अन्य संगठन एन डी ए का चेहरा लेकर 2014में पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनालीतब से अब तक तीन बार केंद्र में सत्ता चल रही है। जिसमें 2024के लोक सभा के चुनावों में भाजपा कुछ तबकों विशेष मध्यम वर्ग की नाराजगी के कारण सत्ता से 32सीट पीछे रह गई। इस बार एन डी ए चंद्रबाबू नायडू एवं बिहारी चाचा के सहारे केंद्र में सत्ता पाने में सफल रहा। इस बार तो शुरुआत से ही केंद्र ओर राज्यों के बीच खासकर सत्ता दल की सरकारों के मुखियाओं में शीतयुद्ध सी स्थिति दिखाई दे रही है कई बयान आर एस एस एवं भाजपा के विपरीत से लग रहे हैं देश में आगामी समय में चुनावी चेहरे को लेकर भी कशमकश चल रही है सामान्य वर्ग भी लग रहा है भाजपा सरकार के निर्णयों से नाराजगी में है। आंकड़ों के आधार पर भाजपा को अब तक बनी सत्ताओं में ये वर्ग एकजुटता से खड़ा रहा यहां तक हिन्दू धर्म के शंकराचार्यों को भी केंद्र ने बोना बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जो सबने देखा ही था। पार्टी में जो दखल संघ का रहा करता था लग रहा है कि कहीं न कहीं कड़ी में जोड़ खुलने वाली स्थिति बन रही है ये आभास यू जी सी आंदोलन एवं अब गत दिवस ही सरकार के सबसे बड़े सहयोगी स्वामी रामदेव द्वारा संबोधन कहिये या सत्ता को खुली धमकी दें डाली।संघ एवं रामदेव की घनिष्ठता को मद्देनजर रखते हुए ये साफ़ हो गया है कि आगामी समय में केंद्रीय सत्ता दल के विरुद्ध कोई बड़ा कदम स्वामी रामदेव द्वारा उठाने की तैयारी की जा रही है लगता है। रामदेव द्वारा संबोधन में सरकार को कह दिया है कि या तो शीघ्र ही हो रहे देश में गड़बड़ियों को सही कर लो वरना हम यानि रामदेव जनांदोलन को खड़ा कर सकते हैं। ये कोई मज़ाक नहीं है साहब खेल गुजराती लॉबी इस समय भाजपा पर भारी पड़ रही है संघ को ये शायद गंवारा नहीं लग रहा है। तो आने वाले 2027के विधानसभा चुनाव 2029के आम चुनाव के ट्रायल होने वाले हैं रामदेव अकेले बोल पाने में समर्थ नहीं लगते इस समय मोदी शाह के मजबूत जोड़ के सामने बोलने वाले को सही सबक सिखाने की काबिलियत केंद्रीय सरकार के चाणक्य शाह की नज़रों के सामने कोई टक्कर में नहीं। पहले 75साल की उम्र की मर्यादा में लाल कृष्ण आडवाणी एवं मुरली मनोहर जोशी को साइड करदिया गया। इस लिहाज से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 75वर्ष के नियम में पूरा हो रहा है।पार्टी में अगले प्रधान कौन होने वाले हैं ये अभी चेहरो को लेकर मंथन किया जा रहा है। शाह/योगी जी इस दौड़ में आम कैडर वोट असमंजस में लग रहा है। यहां संगठन में ही कानाफूसी से तरह तरह की बातें आती रहती हैं। लिखने में बिना दबाव से ही कहते हुए संकोच भी हो रहा है कि संघ की पहचानसे भाजपा आज फर्श से अर्श तक पहुंच चुकी है आने वाले चेहरों पर अभी से अंदर ही अंदर एक प्रकार से लॉबी बननी चालू हो गई है। इसमें हो सकता है कि तीन विचारों में दो एक के बहुमत से आगामी प्रधान सीट पर योगी आदित्यनाथ या गृहमंत्री अमित शाह के मध्य मुकाबला होने की संभावना ज्यादा प्रबल है तो हम क्या माने की रामदेव वर्तमान में किसके बल पर सरकार के विरुद्ध सार्वजनिक रुप से मीडिया में बयान दे गए, हो सकता है कि बदलाव करवाने में स्वामी जी के चेहरे को चुना गया हो।अब आगे फल प्रतिफल संघ विचारधारा वर्सिज भाजपा संगठन के अंदर की पक रही खिचड़ी के पकने या जलने के संकेतों को सामने लाएगा। वैसे कोई कुछ भी कहे मौजूदा परिस्थितियों में जनता ए आम के विचारों से लग रहा है कि 2029के लिए हालात बिल्कुल सही नहीं लग रहे हैं।



