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बड़ी खबर: गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय प्रकरण में हाईकोर्ट ने भारत सरकार, सी बी आई जिलाधिकारी, एस एस पी सहितआर्यसभाओं को नोटिस जारी किया

दो कुलपति एवं दो रजिस्ट्रार, शिक्षक/कर्मचारी आंदोलनरत, कुलपति हेमलता ने कोर्ट में दायर की याचिका

हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय प्रकरण में कुलपति हेमलता द्वारा आज हाईकोर्ट नैनीताल में याचिका दायर कर विश्वविद्यालय के नियमों की अनदेखी करने पर रोक एवं 3मार्च 2025से पूर्व की स्थिति को बरकरार करने की अपील की है। याचिका पर आगामी 18तारीख लगी है।कोर्ट ने भारत सरकार के साथ प्रशासनिक हस्तक्षेप के लिए सी बी आई , तीनों आर्य सभाओं जिलाधिकारी, एस एस पी हरिद्वार एवं सुरेंद्र कुमार आर्य को नोटिस जारी किया है ।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का स्वर्णिम इतिहास रहा है स्वामी श्रद्धानंद द्वारा लगाए गया पौधा आज वृहद वृक्ष बन लाखों छात्रों का जीवन तारक बना। किन्तु गत कुछ वर्षों से इस सम्मानित संस्था के अधिपत्य को लेकर तीन आर्य सभाओं में वर्चस्व की लड़ाई चलती रहती है। विश्व विद्यालय को सन 1962में डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला था।विशेषतः कुलाधिपति पद पर इसके बाद कुलपति रजिस्ट्रार नियुक्त करने पर विवाद के प्रकरण सामने आना आम बात हो गई है जिससे इसे रोपने वाले महापुरुष स्वामी श्रद्धानंद जी के सपने को तोड़ना जैसा हो रहा है। गत दिनों ही वरिष्ठता क्रम में अस्थाई कुलपति हेमलता जी ने प्रभार संभाल लिया था किन्तु व्यवस्था के अनुसार घोषित वैधानिक कुलाधिपति कुलपति को नियुक्त करना होता है किन्तु सभाओं ने बिना प्रशासन को संज्ञान में दिए अन्य  प्रभात कुमार को कुलपति का प्रभार दे दिया जिससे विश्वविद्यालय में आज हास्यास्पद स्थिति बन गई जिसमें दो कुलपति दो रजिस्ट्रार कुर्सियों पर बैठ भारत सरकार की डीम्ड यूनिवर्सिटी के प्रमाण पत्र की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिख रही है। बताया गया है कि केंद्र सरकार ने डीम्ड यूनिवर्सिटी में सरकारी अनुदान देने पर नया नियम बनाया है जिसमें कुलाधिपति एवं कुलपति,  केंद्र द्वारा बनाए जाएंगे जिसके विरुद्ध तीनों आर्य सभाएं 2019वाले नियम पर अड़ी हैं। यदि विश्व विद्यालय में केंद्र सरकार के नियम को लागू नहीं किया जाएगा तो ग्रांट कम होने के साथ ही निजी डीम्ड यूनिवर्सिटी रह जाएगी जिससे पुरानी संस्था का सम्मान पूर्व की भांति नहीं रहेगा। विश्व विद्यालय परिसर में पैदा हुई परिस्थिति को लेकर ही शिक्षक कर्मचारी आंदोलनरत हैं जिन्हें  आगामी दिनों में हाईकोर्ट में दायर याचिका को लेकर न्याय मिलने के लिए नजरें लगी हुई है।

तीर्थ नगरी में लोग इस ऐतिहासिक परिसर को केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मांग भी पहले कर चुके हैं।

 

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