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गंगा की खराब स्थिति पर गंगा स्वच्छता मिशन महानिदेशक ने राज्य के मुख्य सचिव से मांगी रिपोर्ट

गंगा की बदहाली को लेकर भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को प्रेषित पत्र का असर

कृष्णकान्त के एक पत्र से दिल्ली से देहरादून सचिवालय तक हलचल! 

हरिद्वार/देहरादून। राष्ट्रीय लोक सेवा संस्थान के अध्यक्ष कृष्णकान्त द्वारा गंगा की बदहाली को लेकर भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय को प्रेषित पत्र का असर अब दिल्ली से सीधे देहरादून सचिवालय तक दिखाई देने लगा है। कृष्णकान्त के पत्र में ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा के निकट बड़े पैमाने पर ठोस कचरा डंपिंग, अनधिकृत होटल एवं व्यावसायिक निर्माण, कलियर गंगा क्षेत्र में संदिग्ध अवैध खनन तथा गंगा प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए थे। शिकायत का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने प्रकरण को कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाया।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हरिद्वार और देहरादून के जिलाधिकारियों एवं जिला गंगा समितियों को मामले की जांच कर वर्तमान स्थिति और की गई कार्रवाई की तथ्यात्मक रिपोर्ट देने को कहा गया है। इतना ही नहीं, कार्रवाई से संस्थान के अध्यक्ष कृष्णकान्त को सीधे अवगत कराने के निर्देश भी पत्र में दर्ज हैं और इसकी प्रति मुख्य सचिव को भेजी गई है।

इसके बाद मामला देहरादून सचिवालय के शीर्ष स्तर तक पहुँचा। संलग्न पत्र में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव एवं राज्य गंगा समिति के अध्यक्ष आनंद बर्द्धन को पत्र लिखकर गंगा किनारे ठोस एवं गीले कचरे की डंपिंग रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था बनाने, संबंधित अधिकारियों को तत्काल निर्देश देने और कार्रवाई की रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को भेजने की बात कही। कुंभ मेला-2027 के मद्देनजर भी प्रभावी कचरा प्रबंधन की आवश्यकता रेखांकित की गई है।

कृष्णकान्त के पत्र के बाद पहले राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन और फिर मुख्य सचिव स्तर तक मामला पहुँचने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज है।

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