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देवी-देवताओं का अपमान करने वालों के खिलाफ पतंजलि कराएगा मुकदमा: स्वामी रामदेव

पौड़ी गढ़वाल के मालागांव में तीन दिवसीय हर्बल कुंभ का दिव्य और भव्य समापन, अगले वर्ष अक्टूबर में फिर जुटेंगे 

 

 

हरिद्वार। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित मालागांव में आयोजित तीन दिवसीय हर्बल कुंभ-जड़ी-बूटी कृषि मेला एवं श्री धन्वंतरि धाम महोत्सव का समापन भविष्य की बड़ी संभावनाओं, संकल्पों और नए विश्वास के साथ हुआ। समापन अवसर पर योग ऋषि स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म, देवी-देवताओं और अवतारी महापुरुषों के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां करने वालों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने घोषणा की कि भगवान राम, कृष्ण और हनुमान सहित देवी-देवताओं का उपहास उड़ाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पतंजलि में एक विशेष टीम गठित की जाएगी। वहीं, श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण ने श्री धन्वंतरि धाम को प्राचीन भारतीय ज्ञान, आधुनिक विज्ञान, कृषि और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में विकसित करने की भावी योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया।

चार से छह नवंबर तक आयोजित इस हर्बल कुंभ ने जड़ी-बूटी, कृषि, आयुर्वेद, जैव विविधता, किसान कल्याण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक मंच पर लाने का महत्वपूर्ण प्रयास किया। आयोजन का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि हर्बल कुंभ को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान दिलाई जाएगी। अगले वर्ष अक्टूबर में इसे और व्यापक स्वरूप में आयोजित करने की घोषणा भी की गई। तीन दिनों के दौरान 2,500 से अधिक लोगों ने आयोजन में सहभागिता की, जबकि 500 से अधिक लोगों ने यहां रुककर प्रकृति के बीच विकसित हो रही इस अनूठी कार्यस्थली की ऊर्जा और वातावरण का अनुभव किया।

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देवी-देवताओं का अपमान बर्दाश्त नहीं, मुकदमे के लिए बनेगी पतंजलि की टीम : स्वामी रामदेव

समापन समारोह में योग ऋषि स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म और देवी-देवताओं के विरुद्ध की जा रही कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और षड्यंत्रों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भगवान राम, कृष्ण, हनुमान और अन्य अवतारी सत्ताओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां करने वालों को अब कानूनी रूप से जवाब देना होगा। इसके लिए पतंजलि में जल्द ही एक विशेष टीम गठित की जाएगी, जो ऐसे मामलों में मुकदमा दर्ज कराने की पहल करेगी।

स्वामी रामदेव ने कहा कि आज ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि ईश्वर और अवतारी सत्ताओं पर आक्षेप लगाने वालों के समर्थन में भी लोग खड़े हो जाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी को भी हमारे आराध्यों का अपमान करने का अधिकार किसने दिया है? देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक व्यवहार और जूते मारने जैसी घटनाओं को उन्होंने धार्मिक एवं सांस्कृतिक पाप बताया।

उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म, आस्था और महापुरुष का अनादर नहीं होना चाहिए। यदि कोई मोहम्मद साहब या ईसा मसीह के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करे तो उसकी प्रतिक्रिया कैसी होगी, इस पर भी विचार करना चाहिए। स्वामी रामदेव ने कहा कि अब सनातन धर्म का आवरण ओढ़कर बैठे लोगों को भी बेनकाब करने की आवश्यकता है।

हालांकि उन्होंने सभी धर्मों और आस्थाओं के प्रति उदारता का संदेश देते हुए कहा कि कोई किसी का मजाक न उड़ाए और न ही किसी का अनादर करे। जीवन में करने के लिए बहुत कुछ है। आनंदपूर्वक जीवन जिएं, सभी के प्रति प्रेम रखें। हम सब भगवान के अंश हैं। परमात्मा से प्रेम, गुरु का आश्रय और भक्ति ही सनातन का वास्तविक मार्ग है।

शास्त्रों में मिलावट और विकृतियों के मुद्दे पर भी स्वामी रामदेव ने कुछ संतों की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धर्म और शास्त्रों की शुद्धता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

स्वामी रामदेव ने कहा कि श्री धन्वंतरि धाम के निर्माण और विकास में आचार्य बालकृष्ण के योगदान की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि आचार्य बालकृष्ण ने पिछले पांच वर्षों से अखंड और प्रचंड पुरुषार्थ किया है। यह स्थान अब उनकी कर्मस्थली और तपस्थली बन चुका है। धन्वंतरि धाम तक पहुंचने वाले रास्तों से लेकर यहां लगाए गए पेड़-पौधों तक में आचार्य बालकृष्ण का समर्पण और पुरुषार्थ दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि श्री धन्वंतरि धाम आने वाले समय में भारतीय ज्ञान, आयुर्वेद और प्रकृति के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा। अतिथियों का सम्मान, निर्माण में जुटे श्रमिकों के योगदान को भी सराहा।

समापन समारोह में मंचासीन अतिथि विजया इलाहाबादी और उग्रसेन इलाहाबादी को स्वामी रामदेव एवं आचार्य बालकृष्ण ने शॉल और रुद्राक्ष की माला भेंटकर सम्मानित किया।

 

 

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प्राचीनता और आधुनिकता का बेजोड़ संगम बनेगा श्री धन्वंतरि धाम : आचार्य बालकृष्ण

श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि श्री धन्वंतरि धाम प्राचीन भारतीय परंपरा और आधुनिकता का बेजोड़ संगम है। हर्बल आधुनिक अवधारणा का परिचायक है, जबकि कुंभ सनातन संस्कृति का मूल तत्व है। पूज्य स्वामी रामदेव की प्रेरणा और मार्गदर्शन में श्री धन्वंतरि धाम विश्वस्तरीय स्वरूप ले रहा है।

उन्होंने धन्वंतरि जयंती की महत्ता को समुद्र मंथन की पौराणिक परंपरा से जोड़ते हुए हर्बल कुंभ नामकरण के उद्देश्य को स्पष्ट किया। कहा कि इस आयोजन में जड़ी-बूटियों के साथ कृषि को जोड़ना अत्यंत आवश्यक था, क्योंकि कृषि के बिना यह संकल्प अधूरा रह जाता। पतंजलि ने किसी की नकल नहीं की, बल्कि नवाचार के माध्यम से एक नए अध्याय की शुरुआत की है। श्री धन्वंतरि धाम उसी नूतन अध्याय का प्रतीक है।

आचार्य बालकृष्ण ने धाम की भविष्य की योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इसे केवल जड़ी-बूटी और आयुर्वेद का केंद्र ही नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और प्रशिक्षण का भी प्रमुख केंद्र बनाया जाएगा। यहां नॉलेज पाथ, इंटरटेनमेंट पार्क और एडवेंचर स्पोर्ट्स की सुविधाएं विकसित करने की योजना है। साइकिलिंग ट्रैक के साथ साधना एवं ध्यान के लिए विशेष गुफाओं का निर्माण भी किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षण की व्यवस्था होगी। इसके माध्यम से देश ही नहीं, दुनिया के लोगों को भी जोड़ा जाएगा। श्री धन्वंतरि धाम प्रकृति और संस्कृति का संदेश विश्वभर में पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि हर्बल कुंभ का आयोजन भव्य, दिव्य और आनंदमय रहा। इसमें कृषि, जड़ी-बूटी और प्रकृति को एक साथ जोड़ने का सार्थक प्रयास किया गया। उन्होंने आयोजन में शामिल सभी अतिथियों, विशेषज्ञों, किसानों और प्रतिभागियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। हर्बल कुंभ के समापन पर बड़ी तादाद में संत और साध्वी मौजूद रहीं। हर्बल कुंभ के तीसरे दिन की शुरुआत स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने मालागांव में योग से की थी।

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