नवरात्रि में मुस्लिम पार्षद ने किया देवी मंदिर का लोकार्पण
हरिद्वार में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की दिखी खूबसूरत मिसाल

धर्म से अलग, इंसानियत और सौहार्द का रिश्ता
हरिद्वार।
धर्म, आस्था और इंसानियत जब एक साथ दिखाई देते हैं, तो समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे की नई मिसाल कायम होती है। हरिद्वार के वार्ड 44 त्रिमूर्ति नगर के आनंद विहार में नवरात्रि के प्रथम दिन ऐसा ही सौहार्दपूर्ण दृश्य देखने को मिला, जब श्री राम निस्वार्थ सेवा समिति की ओर से साक्षात श्री मां वैष्णो चमत्कारी मंदिर का उद्घाटन मुस्लिम पार्षद अहसान अंसारी के कर कमलों द्वारा किया गया। इस पहल ने धार्मिक विविधता के बीच आपसी सम्मान, विश्वास और हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया।
मंदिर का उद्घाटन केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह भी दर्शाया कि सामाजिक रिश्तों की मजबूती आपसी सम्मान और सद्भाव पर निर्भर करती है। नवरात्रि के पहले ही दी मंदिर उद्घाटन के लिए पार्षद अहसान अंसारी को आमंत्रित किया जाना और उनके हाथों शुभारंभ कराया जाना क्षेत्र में आपसी विश्वास और मिल-जुलकर रहने की भावना को रेखांकित करता है। हरिद्वार की गंगा-जमुनी तहजीब के अनुरूप यह आयोजन इस बात का संदेश देता है कि अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करते हुए समाज में एकता को मजबूत कर सकते हैं।
नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में पहले ही दिन पूज्य माता दीपकला नंदा देवी ने विशेष साधना प्रारंभ की। उन्होंने कीलों की चौकी पर लेटकर तथा पेट पर रखी हांडी के ऊपर दीपक प्रज्वलित कर साधना शुरू की। आयोजकों के अनुसार, यह साधना नौ दिनों तक प्रतिदिन सुबह छह बजे से अगले दिन सुबह चार बजे तक चलेगी।
इस अवसर पर ट्रस्ट अध्यक्ष दीपक राम, रणवीर सैनी, चौधरी राजवीर सिंह, सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक अर्जुन लाल, सतीश जी, अखिल कुमार, रोहन बिरला सहित अनेक स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।
वर्तमान समय में सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को मजबूत बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजनों में विभिन्न धर्मों के लोगों की सहभागिता समाज को जोड़ने का काम करती है। मां वैष्णो मंदिर के उद्घाटन में पार्षद अहसान अंसारी की भूमिका और उनके हाथों से हुए मंदिर के उद्घाटन ने यही संदेश दिया कि जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों के बीच विश्वास, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना भी है।




