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प्राचीन ज्ञान परंपरा केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर नहीं, यह मानवता के कल्याण का वैज्ञानिक आधार: आचार्य बालकृष्ण

पतंजलि अनुसंधान संस्थान और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की संयुक्त विशेषज्ञता से उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा मिलेगा जिसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचेगा:प्रो. राणा प्रताप सिंह

 

 

हरिद्वार। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय की दिशा में आगे बढ़ते हुए पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने राष्ट्र निर्माण एवं वैश्विक स्वास्थ्य कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन करते हुए गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के साथ हाथ मिलाया है। यह समझौता दोनों संस्थानों के मध्य शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने, ज्ञान एवं संसाधनों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के वैज्ञानिक एवं नैदानिक अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है।
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब विश्वभर में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की वैज्ञानिक स्वीकार्यता एवं साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य समाधानों की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है। भारत की प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर परखते हुए उसे वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रभावी अंग बनाने की दिशा में यह साझेदारी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।
इस अवसर पर इण्डोनेशिया प्रवास के दौरान आचार्य बालकृष्ण ने अपने सन्देश में कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा केवल हमारी सांस्कृतिक धरोहर नहीं है, अपितु यह मानवता के कल्याण का वैज्ञानिक आधार भी है। आयुर्वेद एवं भारतीय सनातन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप प्रमाणित कर वैश्विक समाज तक पहुंचना आज के समय की आवयश्कता है। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के साथ यह साझेदारी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
आगे उन्होंने कहा कि जब शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का समन्वय होता है तब समाज एवं राष्ट्र के लिए स्थायी समाधान विकसित होते हैं। यह समझौता युवा वैज्ञानिकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक अध्ययन एवं वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान हेतु प्रेरित करेगा।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने इस अवसर पर कहा कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय और पतंजलि अनुसंधान संस्थान के मध्य हुआ यह समझौता ज्ञापन हमारे विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को नए अवसर प्रदान करेगा। साथ ही भारतीय चिकित्सा पद्धति एवं जैव-चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में यह साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी। पतंजलि अनुसंधान संस्थान और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय की संयुक्त विशेषज्ञता से उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा मिलेगा जिसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचेगा।
इस अवसर पर पतंजलि अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने कहा कि पतंजलि का उद्देश्य आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर स्थापित करना है। पिछले वर्षों में संस्थान द्वारा अनेक उच्च स्तरीय शोध प्रकाशित किए गए हैं, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की विश्वसनीयता को मजबूत किया है।
आगे उन्होंने बताया कि गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के साथ यह समझौता अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन करेगा। संयुक्त शोध परियोजनाएं, शोधार्थी आदान-प्रदान, वैज्ञानिक प्रकाशन तथा अनुसंधान प्रशिक्षण कार्यक्रम इस सहयोग की प्रमुख विशेषताएं होंगी।
पतंजलि अनुसंधान संस्थान और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के मध्य हुआ यह समझौता न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देगा, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के अनुरूप मानवता के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए भी दूरगामी परिणाम प्रदान करेगा।
इस अवसर पर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय से डीन, अकादमी, प्रो. राजीव वार्ष्णेय एवं डीन, प्लानिंग एंड रिसर्च, प्रो एस. धनलक्ष्मी और पतंजलि अनुसंधान संस्थान से विभिन्न विभागों के प्रमुख उपस्थित रहे।

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